126 साल बाद अमेरिका से भारत के नरेंद्र को सुनेगी पूरी दुनिया
11 सितंबर 1893 में का वह दिन जब भारत के महापुरुष भारत माता के पुत्र स्वामी विवेकानंद जीने धर्म संसद में भारत की तरफ से सनातन धर्म को लेकर अपना भाषण दिया था। उनका वह भाषण दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया था। उन्होंने अमेरिका में जब विश्व भर से आए हुए लोगों को मेरे ‘प्यारे भाइयों एवं बहनों’ कहकर संबोधित किया तो जैसे सारा संसार उनके सामने नतमस्तक सा हो गया।
एक बार फिर से 126 साल बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के ह्यूस्टन में हाउडी में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संबोधन का इंतजार पूरी दुनिया कर रही है।
126 साल बाद फिर सुनेगी दुनिया
126 साल पहले जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका में आयोजित की गई धर्म संसद में भाग लेने के लिए अमेरिका पहुंचे थे। उस समय उनके भाषण देने से पहले तक उन्हें वहां पर अपमानित किया गया था। केवल उन्हें ही नहीं बल्कि हमारे धर्म ग्रंथ गीता को भी वहां पर अपमानित किया गया था। परंतु भाषण देकर स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को भारत और सनातन धर्म की ताकत का एहसास कराया था।
कुछ ऐसा ही भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुआ था। जब 2002 के गुजरात दंगों के बाद अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश ने उन्हें पासपोर्ट वीजा उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया था। परंतु वही अमेरिका अब भारत के प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पलके बिछाए बैठा है।
वाराणसी से भी है रिश्ता
स्वामी विवेकानंद और भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का वाराणसी से भी गहरा संबंध है। उन्नीसवीं सदी के शुरुआत में स्वामी विवेकानंद वाराणसी पहुंचे थे और वहां तक लगभग उन्होंने 1 वर्ष का समय व्यतीत किया था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले दो बार से वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं। ऐसे में दोनों लोगों का प्राचीन नगरी काशी से घनिष्ठ संबंध है।
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